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Ramnavmi Ke Din Puja Vidhi Bhojpuri Me

जय श्री राम! भारत के कोना-कोना में आ खास तौर पर हमनी के बिहार, यूपी आ नेपाल के तराई क्षेत्र में राम नवमी के एगो अलग ही उत्साह होला। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि के भगवान विष्णु के सातवाँ अवतार, प्रभु श्री राम के जनम भइल रहे। ई दिन बुराई पर अच्छाई के जीत आ धर्म के स्थापना के प्रतीक हवे।
अगर रउआ अपना घरे राम नवमी के पूजा विधिवत रूप से कइल चाहत बानी, त ई लेख अंत तक जरूर पढ़ीं।


हिंदू धर्म में राम नवमी के बहुत बड़ महत्व बा। मान्यता बा कि एह दिन व्रत रखला आ प्रभु राम के पूजा कइला से जीवन के सारा दुख-दरिद्र दूर हो जाला आ सुख-शांति के वास होला।

"राम नाम कल्पतरु कलि कुटिल जीव निस्तारक।"
यानी कलयुग में श्री राम के नाम ही सभ संकट से उबारे वाला बा।

पूजा खातिर जरूरी सामग्री

पूजा शुरू करे से पहिले ई सब सामान जुटा लीं ताकि बीच में कवनो दिक्कत न होखे:

  • मूरति/तस्वीर: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी आ हनुमान जी के फोटो।
  • अक्षत आ चंदन: पीयर चाहे उज्जर अक्षत (चाउर) आ लाल/पीयर चंदन।
  • फूल: गेंदा, गुलाब चाहे कवनो भी सुगन्धित फूल।
  • पञ्चामृत: दूध, दही, घी, शहद आ चीनी के मिश्रण।
  • प्रसाद: तुलसी दल (अति आवश्यक), खीर, हलुआ, पूरी आ फल।
  • अउरी सामान: गंगाजल, कलावा (रक्षासूत्र), धूप-अगरबत्ती, कपूर, दीया आ शुद्ध घी।

विस्तृत पूजा विधि

1. भोर में उठल आ स्नान कईल

राम नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ के घर के साफ-सफाई करीं। एकरा बाद गंगाजल डाल के पानी से स्नान करीं आ साफ-सुथरा (कोशिश करीं कि पीयर रंग के) कपड़ा पहिरीं।

2. व्रत के संकल्प

हाथ में जल आ अक्षत लेके प्रभु राम के सोझा हाथ जोड़ के संकल्प लीं कि— "हे प्रभु, आजु हम राउर जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्रद्धापूर्वक व्रत रखत बानी, हमार पूजा स्वीकार करीं।"

3. चौकी स्थापना

एगो साफ चौकी पर लाल चाहे पीयर कपड़ा बिछाईं। ओकरा पर भगवान राम के दरबार (राम, सीता, लक्ष्मण) स्थापित करीं। हनुमान जी के मूरति राखे के ना भूलाएब, काहे कि हनुमान जी के बिना राम जी के दरबार अधूरा होला।

4. अभिषेक आ श्रृंगार

सबसे पहिले गंगाजल से मूरति के स्नान कराईं। ओकरा बाद पञ्चामृत से अभिषेक करीं। फेरु साफ कपड़ा से पोंछ के भगवान के सुंदर बस्तर आ गहना (श्रृंगार) चढ़ाईं।

5. तिलक आ अक्षत

भगवान के मस्तक पर चंदन के तिलक लगाईं आ अक्षत चढ़ाईं। "ॐ रामाय नमः" मंत्र के जाप करत रही।

6. भोग आ तुलसी दल

भगवान राम के सात्विक भोग बहुत पसंद बा। खीर-पूरी आ फल के भोग लगाईं। ध्यान रहे: भगवान विष्णु के कवनो भी अवतार के भोग बिना तुलसी के पत्ता के पूर्ण ना मानल जाला।

दोपहरिया में 'जन्मोत्सव' पूजा

चूंकि प्रभु राम के जनम दुपहरी में १२ बजे भइल रहे, एहसे मुख्य पूजा एही समय होला।

  • झूला झुलावल: छोट लइका के रूप में राम जी के पालकी में राखल जाला।
  • भजन-कीर्तन: "भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला..." स्तुति के संगे पूरा परिवार मिल के कीर्तन करे।
  • आरती: कपूर जला के श्री राम चंद्र जी के आरती उतारीं।

राम नवमी के दिन का करे से बचीं?

  • एह दिन घर में लहसुन, प्याज चाहे कवनो भी तामसिक भोजन ना बने के चाहीं।
  • कवनो भी जीव-जंतु के परेशान मत करीं।
  • गुस्सा आ अपशब्द से बचीं, मन के शांत राखीं।

रामचरितमानस आ सुंदरकांड के पाठ

बिहार-यूपी में राम नवमी के दिन अखंड रामायण चाहे सुंदरकांड के पाठ करे के बहुत पुरान परंपरा बा। अगर रउआ लगे समय बा, त रामायण के पाठ जरूर करीं। एकरा से घर के नकारात्मक ऊर्जा खतम हो जाले।

हमरा तरफ से रउआ सभे के राम नवमी के बहुत-बहुत बधाई!

FAQ (अक्सर पूछल जाए वाला सवाल)

Q१. का राम नवमी के व्रत सब कोई रख सकेला?

जी हाँ, बच्चा, बूढ़ आ जवान—जेकर श्रद्धा होखे उ ई व्रत रख सकेला।

Q२. पूजा में तुलसी के पत्ता काहे जरूरी बा?

प्रभु राम विष्णु जी के अवतार हईं आ विष्णु जी के कवनो भी भोग बिना तुलसी के स्वीकार ना होला।

Q३. व्रत में का खाए के चाहीं?

अगर रउआ निराहार नईखीं रह सकत, त फलाहार (फल, दूध, कुट्टू के आटा) ले सकेनी।

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